Wednesday, May 29, 2024
बालकीर्ति

जन्म स्थान :दिल्ली शिक्षा:m.ed,
रचनाएं :विविध पत्र-पत्रिकाओं यथा अलाव ,समकालीन अभिव्यक्ति ,माटी वाणी समाचार ,माध्यम
कथादेश में पुरस्कार व सम्मान: साहित्य समर्था श्रेष्ठ कहानी पुरस्कार ,सीवी रमन साइंस फिक्शन ट्रॉफी ,कथादेश लघु कथा प्रतियोगिता पुरस्कार ,साहित्य समर्था कविता प्रतियोगिता पुरस्कार संप्रति :स्वतंत्र लेखन

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कविताएं

नया कृषि कानून

1. नया कृषि कानून
अदृश्य भूत की तरह वह खेतों की ज़मीन नाप रहा था उल्टे पाँव
2. नया कृषि कानून
“सड़क पर किसानों के तंबू से 2731 करोड़ रुपये स्वाहा, 3 राज्य लपेटे में“ – गडकरी ऑन फारमर्स प्रोटैस्ट
दोनों में टी ओ डबल एल ही था:-
‘टोल प्लाज़ा’ में भी और ‘डेथ टोल’ में भी
आज भी एक मुट्ठी नमक को वे हाईवे की बर्फ में गला रहे थे अस्थियाँ।
3. नया कृषि कानून
कुछ के लिए वह सूँड थी
कुछ के लिए थी पूँछ
कुछ के लिए कान
किसी भी मीडिया चैनल के लिए
वह नहीं था हाथी!
4. नया कृषि कानून
इस बार भी हरी के नाभि कँवल में ही थे उसके रचयिता
अपनी ही ‘शतरूपा’ सृष्टि पर आसक्त!
5. नया कृषि कानून
अन्धे निज़ाम की पतिव्रता सी
उसकी इबारत ने बाँध ली थी आँखों पर पट्टी!
6. नया कृषि कानून
श्रवण सा एक अँधी वहँगी में
वह ढो रहा था अपने अँधे पालकों को!
7. नया कृषि कानून
वह इन्द्र का ऐरावत था, उसकी पूँछ पकड़ने वाले ही जा सकते थे स्वर्ग!
8. नया कृषि कानून
राम की प्रतीक्षा में अपनी ही कुटिया से बाहर थी शबरी!
9. नया कृषि कानून
आँखें फाड़े देख रहा था-
कैसे बिना भाँग और बिना धतूरे
कैलाश पर डटे
हुए थे शिव
10. नया कृषि कानून
किसान मायें थीं
माँ भागो की तरह खेलती थीं गतका
समझौते की बात सुन
गर्भ में उलट गये थे शिशु
11. नया कृषि कानून
प्रधानमंत्री का कहना था- “अब आप कहीं भी बेच सकेंगे“
वे हँसे जिनके कँधे पर हल था- पर आप “कहीं भी“ बेच नहीं सकेंगे!
12. नया कृषि कानून
इस बार हजारों राउंड फायर से पहले उसने नहीं आदेशा- ‘फायर’
उसकी तूणीर में था- ‘शब्दभेदी बाण’

जिंगल बैल्स जिंगल बैल्स जिंगल आल द वे

1. नया कृषि कानून
    सांता का खिलौना था
    जिंगल बैल्स जिंगल बैल्स
    जिंगल ऑल द वे
    गाता वह गुज़र रहा था
कि देखा- जिंगल बैल्स जिंगल बैल्स
        ब्र्रिंजल ऑल द वे!
2. नया कृषि कानून
क्रिसमस ट्री पर इस कदर
    इतना सारा था तामझाम
कि भरपूर रोशनी में भी
    नज़र नहीं आ रहे थे-
        डाली पत्तियाँ या फल!
3. नया कृषि कानून
वह जगमग था क्रिसमस ट्री सा
और बँधा हुआ था
रंगबिरंगे कृत्रिम रिब्बनों 
और गूँगी घंटियों से
सांता के तोहफे
1.    हर शाख़ से ‘मोज़ा’ लटका है
    अज़ामें गुलिस्तां क्या होगा?
    सांता ने सीख लिया था-
    गंदे मोज़े उलट के पहनें।
 
2.    सांता के झोले में थी स्वदेशी खड़ाऊँ
    वल्कल वस्त्र कंद मूल और
    मेक इन इंडिया अगरबत्ती!
3.    उसने अपने को छोटा-बड़ा
    बनाना सीख लिया था
    सारी कालिख और धुएं को अन्दर
    समेटे उज्ज्वल चिमनी से वह
    निकल रहा था- गरुढ़ासन में!

सांता और अरोकेरिया

1.    वर्ष भर सांता के क्रिसमस ट्री के लिए
    नन्हें नन्हें सिरों पर ढो ढोकर लाते रहे थे
            गाय का गोबर
    फिर क्यूँ मिली सांता के बंदरों को स्टाकिंग्स में
        – कोयले की गाँठ!!
सांता की सुरक्षा
1.    हँसने से डरता है सांता 
    हँसने से डरता है उसका पेट
    हँसने से हिचकिचाते हैं रेंडियर्स
    अब तो उसके मुफ्तखोर बौने भी नहीं सुनाते चुटकुले
    कहीं उलट ना दे जेली के ढेर!
2.    सीक्रेट सेंटा:-
    खिलौना बंदूकों के वाटर जेली शॉटस से भी
        डरता है सांता!
    आकाश से चिमनी तक
        कई कई बार बदलता है रूट!
 
 
3.    सांता और मंकी पज़ल:-
    नाऊ डैशर नाऊ डांसर नाऊ प्रांसर नाऊ विक्सेन
    नाऊ योगी नाऊ भोगी एस.पी.जी. आई.बी.
    हाथ उठाउठा कर चीख रहा था सांता
    “डैश अवे डैश अवे“ “टू दी टॉप“
    फिर भी सुई जैसी पत्तियों के नेटवर्क में
    उलझते फिसलते लुढ़कते
    चले जाते थे सांता के बंदर!
4.    लम्बे घुमावदार थे सींग 
    नथुनों में फडक रही थी आग
    फिर भी खींच नहीं पा रहे थे
    सांता के रेंडियर्स
    सांता की बेपहियों की गाड़ी!
सांता का जिंगल
जिंगल बैल्स जिंगल बैल्स जिंगल बैटन था उसके हाथ में
    अपना अपना जिंगल लिये
        उसके बौनों में होड़ मची थी-
            ऊँची से ऊँची घंटी बजाने की!

सांता का मार्चिंग बैंड

1. आज भी नन्हे नन्हे खुरों में बिजली की गति से
कदमताल करते हैं सातां के रेंडियर्स
डैश अवे डैश अवे की घुड़की पर!
2. उत्तरी ध्रुव पर उसकी मार्चिंग बैंड कार्यशाला में
सांता के रबड़ के बौनों ने
पीतल की खोखली घंटियों पर
नन्ही नन्ही छड़ियाँ घुमाते मारते कुछ
हसीन सी ‘जिंगल’ धुनें बजाईं-
‘गिव मी अ ब्रेक’ ‘सब वे फाईव डालर फुट लान्ग’
‘आई एम ए बिग किड नाऊ’
सिस्टम प्लग इन लीड के पावर कार्ड पर
उसका बीटर थिरक उठा-
आई एम लव इन इट!

3
पत्थर
हैप्पीनेस क्लास में भी
एक पत्थर था मिलेनिया ट्रंप
जिस पर चाक से लिखीं इबारतें थीं
उस ताजमहल में भी एक पत्थर था
जो पत्थर तुम्हें दिन भर दिखाये गये
उनसे अलग भी एक अदृश्य पत्थर था
जिसे तुमने नहीं देखा-
तिरंगे के ठीक बीचों बीच
अशोक चक्र को भेदता।

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