Monday, June 17, 2024
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हिंदी की प्रसिद्ध कवि उपन्यासकार और अनुवादक सुलोचना वर्मा को आज यहां 16 वे शीला सिद्धान्तकार सम्मान से विभूषित किया गया।

राग विराग संस्था द्वारा गांधीशांति प्रतिष्ठान में आयोजित समारोह में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित लेखिका नासिरा शर्मा ने सुलोचना वर्मा को यह पुरस्कार प्रदान किया। पुरस्कार में पंद्रह हजार रुपये प्रशस्ति पत्र और प्रतीक चिन्ह शामिल है।
समारोह में पुरस्कार समिति के अध्यक्ष एवम प्रसिद्ध आलोचक डॉक्टर नित्यानंद तिवारी जानी मानी आलोचक रोहिणी अग्रवाल नारायण कुमार आदि मौजूद थे।चर्चित कवयित्री लीना मल्होत्रा रूपा सिंह पूनम अरोड़ा राजेन्द्र शर्मा हीरालाल नागर शोभा अक्षर भी उपस्थित थी।
स्त्री केंद्रित कविता की प्रमुख हस्ताक्षर कवि, संगीतकार और एक्टिविस्ट शीला सिद्धांतकार की स्मृति में प्रतिवर्ष दिया जाने वाला शीला सिद्धांतकार स्मृति पुरस्कार सुलोचना व को उनके कविता संग्रह ‘बचे रहने का अभिनय’ के लिए दिया गया । शीला सिद्धांतकर ने ‘कहो कुछ अपनी बात’ से लेकर ‘कविता की आखिरी किताब’ तक अपनी सात-आठ सौ कविताओं में समाज और मुख्यतः स्त्री समाज को दार्शनिक और व्यवहारिक रूप से और संजीदगी के साथ अभिव्यक्त किया है जिनको हिन्दी के लगभग सभी प्रमुख आलोचकों ने विद्रोही कविताओं के तौर पर चिन्हित किया है। इसलिए यह पुरस्कार ऐसी युवा स्त्री कवियों को दिया जाता है जो इस कड़ी को आगे बढ़ाने की योग्यता रखती होती हैं। सुलोचना वर्मा की कविताएं बंगीय संस्कृति और रहन सहन को संवेदनात्मक रूप से चित्रित तो करती होती हैं लेकिन साथ ही शेष भारत और विश्व को भी अपने काव्य के भीतर समाहित किए हुए हैं। इसलिए सुलोचना की कविताएं स्थानीयता से शुरू होकर अन्तर्राष्ट्रीयता तक के आयाम को रचित और पुनर्रचित करती होती हैं। निर्णायक मण्डल में समिति के अध्यक्ष नित्यानंद तिवारी सहित राग विराग संस्था के प्रतिनिधि शिवमंगल सिद्धांतकर, कवि अनामिका, लीलाधर मंडलोई, रेखा अवस्थी, ज्ञानचंद बागड़ी और पुरस्कार समिति के सचिव रवींद्र के. दास शामिल हैं। पहला शीला सिद्धांतकर स्मृति पुरस्कार कवि नीलेश रघुवंशी को कृष्णा सोबती के द्वारा सन् 2006 में दिया गया था। यह पुरस्कार हिंदीतर साहित्य के कवियों को भी दिया जाता रहा है जिसमे मराठी कवि कल्पना दुधाल और पंजाबी कवि नीतू अरोड़ा उल्लेखनीय हैं।
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